Shashi Sinha

Shashi Sinha

डॉ. शशि बी. सिन्हा एक बायोमेडिकल इंजीनियर, मेडिकल डिवाइस कन्सल्टेन्ट तथा प्रक्योरमेन्ट एक्सपर्ट हैं और उन्हें स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी प्रबंधन में तीस वर्षों का अनुभव है। उन्होंने अर्थव्यवस्था और कौशल विकास पर पांच पुस्तकें लिखी हैं। आखिरी बार अपने माता-पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने अपनी मां की कहानी लिखने का फैसला किया। 

 

उनका अपनी मां देव सखी से गहरा लगाव था 

अपनी जिंदगी की जंग में उसे ग्रामीण व्यवस्था का काफी संघर्ष खेलना पड़ा। उसके रिश्तेदारों नें  गांव वालों के साथ मिलकर उसे गांव से निकालने की काफी कोशिश की पर वह पूरी व्यवस्था से लड़ती  हुई आगे बढ़ती  रही तथा अंत में उसे एक सफल जिंदगी मिली। 

इस जिंदगी की जंग में उसे ब्रेन स्ट्रोक हो गया तथा तमाम कोशिशों के बावजूद वह पैरालाइज हो कर असहाय हो गयी और बच्चों के साथ रहने लगी शहर में आकर। 2 साल वह पैरालाइज रहीं और अपने आखिरी समय में अपने परिवार के साथ रहने का उसको मौका मिला। 

  2 साल लकवा की स्थिति में  रहने के बाद वह इस संसार को अलविदा कह गयी। उसे इस बात का संतोष था कि उसके सभी बच्चे सुखी सम्पन्न जिन्दगी व्यतीत कर रहे हैं यह एक सच्ची घटना पर आधारित कहानी है मुझे उम्मीद है  उम्मीद है कि उसकी कहानी लाखों महिलाओं के लिए एक प्रेरणा साबित  होगी।


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Dev Sakhi Ek Maa

देव सखी ऐसे मां की कहानी है जिसने अन पढ़ होते हुए भी अपने दोनों बेटों को इंजीनियर बनाया। खुद गांव में रही जबकि उनके पति सरकारी विभाग में अकाउंटेंट थे। उसने अपनी सारी सुख सुविधाओं को त्याग करते हुए गांव में रहना स्वीकार किया काफी मुश्किलों के बाद भी अपने संकल्प पर अडिग रही तथा निडर होकर पूरे गांव की व्यवस्था से लड़की रही और अंत में विजय प्राप्त की। अपनी जिंदगी की जंग में उसे ग्रामीण व्यवस्था का काफी संघर्ष खेलना पड़ा। उसके रिश्तेदारों नें गांव वालों के साथ मिलकर उसे गांव से निकालने की काफी कोशिश की पर वह पूरी व्यवस्था से लड़ती हुई आगे बढ़ती रही तथा अंत में उसे एक सफल जिंदगी मिली। इस जिंदगी की जंग में उसे ब्रेन स्ट्रोक हो गया तथा तमाम कोशिशों के बावजूद वह पैरालाइज हो कर असहाय हो गयी और बच्चों के साथ रहने लगी शहर में आकर। 2 साल वह पैरालाइज रहीं और अपने आखिरी समय में अपने परिवार के साथ रहने का उसको मौका मिला। 2 साल लकवा की स्थिति में रहने के बाद वह इस संसार को अलविदा कह गयी। यह एक सच्ची घटना पर आधारित कहानी है मुझे उम्मीद है उम्मीद है कि उसकी कहानी लाखों महिलाओं के लिए एक प्रेरणा साबित होगी। यह पुस्तक मेरी माँ और पिताजी को समर्पित है। ऊन को बहुत मिस करता हूँ। आप लोग जहाँ भी रहो अपना आशीर्वाद हम पर बनाए रखना और हमारी गल्तियों को माफ करना।

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